* बापू के देवघर और मधुपुर की यात्रा के 100 साल पूरे
* गांधी की स्मृतियों से जुड़ी चित्र प्रदर्शनी लगाई गई, सेमिनार आयोजित
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बाबू और बैद्यनाथ पुस्तक के आवरण का लोकार्पण करते अतिथि। |
गांधी कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारधारा हैं : प्रो. नंदन
ेएएस कॉलेज के इतिहास विभाग के एचओडी प्रो. नंदन किशोर द्विवेदी ने कहा कि गांधी कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारधारा हैं। विचारधारा तबतक नहीं मरेगी, जब तक उमेश जी जैसे लोग हैं। गांधी जी के दो बार देवघर और मधुपुर आगमन में सर्वाधिक उद्देश्य सामाजिक था। लेकिन दुखद यह है कि इंटरनेट और गुगल में गांधी के देवघर आगमन के बारे में भ्रामक बातें लिखी गई है। गुगल में लिखा गया है कि बापू बैद्यनाथ मंदिर से बैरंग लौट गए, जो बिल्कुल गलत है। गांधी जी ने कहा था कि जबतक दीवाने आम की स्वीकृति नहीं हो जाती है, तब तक बैद्यनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर कोई विचार नहीं थोपूंगा।
गांधी को अंगीकार करने की जरूरत है : घनश्याम
गांधीवादी समाजसेवी घनश्याम ने कहा कि गांधी को अंगीकार करने की जरूरत है। गांधी का महिमा मंडल छोड़ जब तक उन्हें हम बरतेंगे नहीं, तब तक आजादी का जो उन्होंने सपना देखा था, वह पूरा नहीं होगा। गांधीवादी विचारक कुमार रंजन ने कहा कि गांधी के विचारों में आज की पीढ़ी को जीने का कला सिखाना ज्यादा उचित होगा। जेपी आंदोलनकारी तारकेश्वर सिंह ने कहा कि गांधी की हत्या के बाद उनके विचार को आगे बढ़ाना था, तो क्या वह हो पाया? गांधी के देवघर आगमन के दौरान मेरे पूर्वजों ने अहम भूमिका निभाई थी, जिसे आज भी याद किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा के जानकार डॉ. मनोज ने कहा कि ऐसे समय में सजग रहने की जरूरत है, जहां गांधी विचार की हत्या हो रही है। गांधी विचार पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं। सोशल मीडिया में गांधी को लेकर उल्टी-सीधी बातों से समाज को दिग्भ्रमित करने का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम में दिगंबर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, संस्थान के सचिव उमेश कुमार, शिक्षक डॉ. विजय शंकर समेत अन्य ने भी अपने-अपने विचार रखे।
दुर्लभ तस्वीरों के जरिए गांधी की देवघर-मधुपुर यात्रा का चित्रण
गांधी की देवघर और मधुपुर यात्रा के 100 साल होने पर पर झारखंड शोध संस्थान की ओर से स्थानीय आरएन बोस लाइब्रेरी में चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी के जरिए बापू की देवघर और मधुपुर से जुड़ी यादों को दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से झारखंड शोध संस्थान ने आज की पीढ़ी को यह बताया कि कैसे बापू ने देवघर में छूआछूत को खत्म किया था और आदिवासी, संतालों के बीच जाकर हड़िया, दारु के खिलाफ अभियान चलाया था। बैद्यनाथ मंदिर में बापू का विरोध, उनकी कार पर हमला, मधुपुर का तिलक विद्यालय, नगरपालिका की स्थापना से लेकर बापू के दो बार देवघर और मधुपुर आगमन की तस्वीरों में देख लोग गांधी दौर में विचरण करने लगे। प्रदर्शनी को काफी सराहा गया।
We consider Gandhi respectable, but not exemplary: Dr. Vijay
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