* कबाड़ीवालों को छड़ देने का लालच देकर तुड़वाई जा रही थी स्कूल की छत
* स्कूल समिति बिना किसी सुरक्षा मानकों का पालन किए करा रही थी काम
* दुधीटांड स्कूल छत गिरने से दो कबाड़ीवाले की हुई थी मौत, एक घायल
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हादसे के बाद बुलडोजर से निकाला गया था शव। |
Amit Sahay/ Giridih : गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र में रविवार को दुधीटांड़ स्कूल की छत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा स्कूल की समिति की मनमानी और लापरवाही के कारण हुआ। समिति के लोग बिना किसी सुरक्षा मानक का पालन किए कबाड़ीवालों को छड़ देने का लालच देकर उन्हीं से स्कूल की छत तुड़वा रहे थे। दोनों कबाड़ीवाले अशादुल और हसीबुर पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पुलासी थाना क्षेत्र अंतर्गत कालीगंज के रहनेवाले थे।
सूत्रों ने बताया कि जर्जर स्कूल भवन को तोड़ने का काम शनिवार की सुबह 8-9 बजे के बीच शुरू किया गया था। पैसा बचाने के लिए स्कूल की समिति से जुड़े लोग और प्रधानाध्यापक कबाड़ीवालों से काम करा रहे थे। दोपहर में स्कूल बंदकर के सभी कर्मचारी चले गए, लेकिन दोनों कबाड़ीवाले छत तोड़ते रहे। छत गिरने से दोनों कबाड़ीवाले की मौत हो गई। वहीं, एक मजदूर का पैर मलबे में फंस गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे बचाया गया। इस दुर्घटना ने विद्यालय प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। आखिर, स्कूल की छत तोड़ने के दौरान क्यों नहीं सुरक्षा नियमों का पालन किया गया? यह घटना स्कूलों में आपातकालीन सुरक्षा उपायों और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। अब सवाल यह है कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? इस मामले पर प्रशासन की चुप्पी और जवाबदेही को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। क्या यह घटना सिर्फ और सिर्फ स्कूल की समिति और प्रधानाध्यापक की लापरवाही का परिणाम है?
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सरकार और प्रशासन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या फिर ऐसी घटनाएं महज एक आंकड़ा बनकर रह जाएंगी?
Giridih school accident: Why shouldn't a murder case be filed against the school committee and the principal?
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